Wednesday, 1 February 2017

ब्रह्मा जी की सर्जना में आया ट्विस्ट जब ‘वाणी की देवी’ ने की एंट्री


बसंत ऋतु की एंट्री होते ही प्रकृति में नई चेतना और उमंग भर जाती है. इंसान से लेकर पशु-पक्षी भी एक्साइटेड हो जाते हैं. हर दिन नयी उम्मीदों वाली आशा का सूर्योदय होता है. अगले दिन फिर नई उमंग के साथ शानदार एंट्री करता है. वैसे तो माघ का पूरा महीना स्पेशल एनर्जी देता है. लेकिन बसंत पंचमी का पर्व कण-कण में उत्साह भर देता है. प्राचीनकाल से इस दिन को ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती के हैप्पी बर्थडे के रूप में मनाया जाता है. आज के दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं.

जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू और बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है. चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं.

बसंत पंचमी की पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में मनायी जाती है. इस दिन पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं.
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें बसंत लोगों का फेवरेट मौसम था. इस मौसम में बागों में, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता.

इस ऋतु का वेलकम करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था, इस दिन विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह बसंत पंचमी का कहलाता था.

बसंत पंचमी की स्टोरी

जग के पालनहार विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों और खासतौर पर मनुष्य की रचना की. अपनी बनाई गई रचना से ब्रह्मा जी खुश नहीं थे. उन्हें कुछ कमी लग रही थी तो क्या. पालनहार से परमीशन लेकर ब्रह्मा जी ने कमण्डल से जल छिड़का. जल छिड़कने के बाद कहानी में आया ट्विस्ट और पृथ्वी में कम्पन होने लगा.

वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई. यह शक्ति कोई और नहीं बल्कि चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था. अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी.

ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने की रिक्वेस्ट की. जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई. जलधारा में कोलाहल, पवन चलने से सरसराहट होने लगी. तब ब्रह्मा ने उन्हें वाणी की देवी सरस्वती कहा.

देवी सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है. ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं.

ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

ये परम चेतना हैं. सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं. हममें जो आचार और मेधा है, उसका आधार सरस्वती ही हैं. इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है.
शास्त्रों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी.

बसंत पंचमी का पौराणिक महत्व

त्रेता युग में जब रावण ने सीता माता का किडनैप किया. उसके बाद प्रभु श्रीराम ने माता की खोज में दक्षिण की ओर बढ़े. इसमें जिन स्थानों पर वे गये, उनमें से एक दंडकारण्य भी था. यहीं शबरी ने राम की भक्ति में लीन होकर उन्हें चख-चखकर मीठे बेर खिलाये. दंडकारण्य का गुजरात और मध्य प्रदेश में फैला है. गुजरात के डांग जिले में शबरी मां का आश्रम था. वसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी वहां आये थे. आज भी लोग उस शिला को पूजते हैं, जिस पर श्रीराम आकर बैठे थे. शबरी माता का मंदिर भी है.


Wednesday, 25 January 2017

संविधान के 70 साल बाद भी नहीं मिले अधिकार, वंदेमातरम्


आज हम 70वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं. 26 जनवरी क्यों और कैसे मनाते हैं ये तो सभी को पता है. इतिहास को फिर से बता कर आपका टाइम नहीं वेस्ट करूंगी. बस कुछ मेन पॉइंट्स पर रोशनी डालने की कोशिश कर सकती हूँ. बाकी तो सब अव्वल दर्जे के समझदार हैं.

26 जनवरी 1950 में देश का सविंधान लागू किया गया था. शायद यही सोचकर की देश का विकास और उन्नति होगी. लेकिन दोनों ही बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं.
हर साल की तरह इस साल भी इस राष्ट्रीय पर्व को बड़ी शान ओ शौकत के साथ मनाया जाएगा. 

पूरे देश में देशभक्ति के गानों की गूंज है. स्कूलों, कालेजों और राजपथ पर झांकियां और परेड होगी. सभी तिरंगे को सलामी देंगे.
हम बड़ी शान से दुनिया के सामने लोकतांत्रिक देश बने हुए हैं.

आजादी के बाद जब संविधान बना तब सबको यही लगा हमें जाति, धर्म, भाषा, बोली और क्षेत्र के नाम पर हमारा बंटवारा नहीं होगा. सब एक समान होंगे.
संविधान के शिल्पकार डॉ भीमराव अंबेडकर ने भी एक बेहतर भारत की कल्पना की थी. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.   

संविधान के मूल हक...

देश में रह रहे सभी के समान अधिकार और नियम हैं. लेकिन उनका ही पालन इस लोकतान्त्रिक देश में नहीं हो पा रहा. सभी नागरिकों को मूल अधिकार दिए गए हैं.
अपनी इच्छा से कहीं भी रह सकते हैं. कुछ भी बोल सकते हैं और कोई भी धर्म अपना सकते हैं. लेकिन असलियत तो कुछ और ही है. लोगों को उनके अधिकारों का ज्ञान ही नहीं है. 

अक्सर मॉडर्न इंडिया के लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी ही नहीं होती है.
आज भी 14 साल से कम उम्र के बच्चे खेलकूद छोड़ मजदूरी कर रहे हैं. नियम और कानून का उल्लघंन हो रहा है. जिस देश में बच्चों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, वहीं उनसे बाल मजदूरी कराई जा रही है.
सबका विकास होगा, भरपेट खाना मिलेगा, युवाओं को नौकरी, बेरोजगारी दूर होगी, 
सबसे महत्वपूर्ण महिलाओं को सुरक्षा मिलेगी यह मात्र एक छलावा है. सरकार की आर्थिक और सामाजिक नीतियां सबकी मदद के लिए बनाई जाती लेकिन जैसी ही बनती हैं, वैसी धड़ाम से गिरती भी हैं. ज्ञान कुछ ज्यादा तो नहीं हो गया.

गणतंत्र का मतलब 

लोगों के लिए 26 जनवरी का मतलब जो भी होता हो लेकिन मेरे लिए तो यही है...
गणतंत्र का सही अर्थ जनता का राज, जहां की सत्ता जनता के हाथों में हो. 
इस लोकतांत्रिक देश में लोग अपने वोट से सरकार पर भरोसा कर उसे चुनते हैं.
सरकार का बस यही काम है कि वह अपने सारे काम लोगों की भलाई में करे और सोचे.
अफ़सोस की बता है अक्सर ऐसा कुछ होता नहीं. फिर भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ सकते हैं. हर सुबह एक नए उजाले के साथ आती है. 

सभी को 26 जनवरी की शुभकामनाएं... वंदेमातरम्
देशभक्ति जाग गई...













Saturday, 14 January 2017

Spirit of India : मकर मकर संक्रांति पर ‘खिचड़ी’ ही क्यों बनती है, दही बड़े के चटखारे के साथ लीजिए इंट्रेस्टिंग कहानी का मजा



28 साल बाद मकर संक्रांति पर सर्वार्थ सिद्ध, अमृत सिद्धि के साथ चंद्रमा कर्क राशि में जबकि अश्लेषा नक्षत्र और प्रीति और मानस योग का संयोग बना है। इस मकर सक्रांति सिद्धि योग में गज यानी हाथी पर सुख-समृद्धि का शुभ संदेश लेकर आएगी।
सूर्य के उत्तरायण होने के बाद 16 जनवरी से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी. देव अपने पुत्र शनि के घर में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
मकर मकर संक्रांति का ये पावन पर्व सूर्य को समर्पित है। सूर्य एक तत्व और महत्वपूर्ण ग्रह भी है। हमारे देश में सूर्य को भगवान की उपाधि दी गयी है। सूर्य धार्मिक और वैज्ञानिक दोनो रूपों में अपनी भूमिका निभाता है। सूर्य ऊर्जा का स्रोत है, जिसके बिना जीवन संभव नहीं है। इसका प्रकाश जीवन को नयी ऊर्जा से भरता है।
                   इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में   प्रवेश करता है और दक्षिण से उत्तर की ओर गति करने लगता है इसी  कारण इसे उत्तरायणी पर्व भी कहते है। इस दिन से ही मांगलिक कार्यो की भी शुरूआत हो जाती है। 
                  
             भारतीय काल गणना के अनुसार वर्ष में १२संक्राति होती है और इनसे सबसे महत्वपूर्ण संक्रान्ति मकर संक्रान्ति है। इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और सौर मास की शुरूआत होती है। इस दिन से ही सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध से उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरु होता है और दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते है।
    मकर संक्रांति का पर्व तो एक ही है पर सभी राज्यों में अलग -अलग नाम और अलग तरीके से मनाते है. सभी जगहों पर सूर्य की पूजा की जाती है। इस दिन तिल ,गुड़ आदि से पूजा होती है। कपड़े ,तिल गुड़ ,मूंगफली का दान देते है।
                    इस पर्व को मनाने के लिए कई पौराणिक कहानियाँ भी हैं
     इसी दिन सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर गये थे।क्योंकि शनिदेव मकर राशि के है इसलिए मकर संक्रांति मनाते है।
शास्त्रों के अनुसार भागीरथी ही गंगा को धरती पर लाये थे। उनकी तपस्या से खुश होकर वे उनके पूर्वजों के तर्पण के लिए धरती पर आयीं। भागीरथी के पूर्वजों के तर्पण के बाद सागर से जा मिली। आज भी  मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में मेला लगता है।
     महाभारत के महान योद्धा पितामह भीष्म ने अपनी देह त्यागी  थी।
          पूरे उत्तर भारत में लोग इसे खिचड़ी के नाम से भी जानते है। इस दिन गंगा स्नान ,तिल  गुड़ से पूजा  करते है ।पूजादि के बाद सभी घरों मे खिचड़ी खायी जाती  है।
खिचड़ी बनने की परंपरा
              खिचड़ी बनने की परंपरा की शुरूआत बाबा गोरखनाथ ने की थी।अलाउद्दीन खिलज़ी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को युद्ध के बाद भोजन बनाने का समय नही मिलता ,जिससे वे भूखे ही सो जाते थे।बाबा जी ने समस्या के समाधान के लिए दाल सब्जी,चावल को एक साथ पकाने की सलाह दी और इसका नाम खिचड़ी रखा।खिचड़ी से नाथ योगियों को भूखा नही रहना पड़ता। युद्ध मे जीतने के बाद गोरखपुर में इसे मकर विजय दर्शन के रूप मे मनाया जाता है। गोरखपुर मे इस दिन बाबा जी के मंदिर के पास मेला लगता है और उन्हे खिचड़ी का भोग लगाया जाता  है।
मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ायी जाती है। अहमदाबाद में मकर संक्रांति के दिन अंतराष्ट्रीय पतंगबाजी महोत्सव मनाते है।

                                                                     

Tuesday, 20 December 2016

फ्रेडी ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया नाम

इस दुनिया में अजीबोगरीब चीजें देखने को मिलती हैं, जिन्हें देखकर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है. इंग्लैंड के इसेक्स में फ्रेडी नाम के डॉग अपनी ऊंचाई के कारण पूरी दुनिया में फेमस हो गया है.
फ्रेडी की ऊंचाई 7 फीट 6 इंच है, जो किसी औसत इंसान से ज्यादा है. 
फ्रेडी ने अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया है. ग्रेट डैन नस्ल के डॉग को दुनिया का सबसे बड़ा जीवित डॉग माना गया है.
फ्रेडी अब ऑफिशियल दुनिया का सबसे ऊँचा डॉग है. इसका वजन 92 किलोग्राम है. चार साल के फ्रेडी का पसंदीदा खाना रोस्ट चिकन और पीनट बटर टोस्ट है. वह कभी जमीन पर नहीं बैठता. क्योंकि उसे सोफे पर बैठने की आदत हो गई है. अब तक वह 23 सोफे़ खराब कर चुका है.
फॉर्मर ग्लैमर मॉडल क्लेयर स्टोनमैन फ्रेडी की मालिक हैं, जो उसकी और उसकी बहन फ्लयूर की पूरी देखभाल करती हैं. क्लेयर को डॉग्स पसंद हैं. स्टोनमैन के मुताबिक, ‘मुझे कोई बच्चा नहीं है. इसलिए मैं इन्हें अपने बच्चों की तरह पालती हूं. ये मेरे बच्चे हैं.’

हर साल फ्रेडी की देखरेख में लगभग 10 लाख से भी ज्यादा खर्च होता है.

Friday, 16 December 2016

हर साल बरसी मनाने से नहीं आएगा बदलाव



16 दिसंबर 2012 को दिल वालों की दिल्ली ही नहीं पूरा देश शर्मसार हुआ था. इस सर्द रात में चलती बस में एक लड़की के साथ रेप की दिल दहलाने वाली घटना को अंजाम दिया गया. रेप और मारपीट के बाद उसे और उसके दोस्त को सड़क पर मरने के लिए फेंक दिया गया. घटना के 11 दिनों के बाद निर्भया की मौत हो गई. उन छह आरोपियों के खिलाफ केस चला. इस घटना को आज चार साल हो गए हैं. लेकिन इन चार सालों में अनगिनत लड़कियों के साथ रेप की घटनाएं हुई हैं. इन चार सालों में आज भी निर्भया को इंसाफ की गुहार है.
इस घटना के बाद सारा देश निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए एकजुट हो गया. निर्भया' के सपोर्ट में लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किए ताकि अपराधियों को फांसी हो सके. इंडिया गेट पर बूढ़े से लेकर बेफिक्रे यंगस्टर ने भी जिम्मेदारी के साथ इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया, ताकि निर्भया को इंसाफ मिल सके.
ठंड में पुलिस की लाठियों के साथ ठंडे पानी की बौछार ने भी लोगों का गुस्सा ठंडा नहीं पड़ने दिया.

हर साल बरसी मनाने से नहीं मिलेगा निर्भया को इंसाफ

निर्भया का परिवार अपनी बेटी को न्याय दिलाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन शायद समय के साथ निर्भया को भूलते जा रहे हैं. केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को अपनी खींचतान को किनारे रखते हुए इस मुद्दे और महिलाओं की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है. हर साल बरसी मनाकर या निर्भया को याद करके कैंडिल मार्च करने से बात नहीं बनने वाली.  
जब इंसाफ के इंतजार में निर्भया की मां आशा देवी ने अपना दर्द बयां किया. तो लगा समय की धूल की परत लोगों के दिमाग पर चढ़ गई है. जिस कारण माँ ये कहना पड़ा. उन्होंने कहा, 'चार साल हो गए लेकिन अभी तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिल पाया है. शुरूआत में लोगों का काफी साथ था, लेकिन अब धीरे-धीरे लोग भूलते जा रहे हैं.' माँ ने कहा, 'मेरी बेटी नहीं रही. लेकिन अब यह सब मैं अपने लिए नहीं कर रही हूं. दूसरी बच्चियों के साथ ऐसा ना हो इसलिए जरूरी है कि इन्हें सजा मिले.'
आज भी लड़कियों के साथ रेप की घटनाएं हो रही हैं. उसे देखकर नहीं लगता है कि कोई फर्क पड़ा है. कानून व्यवस्था में जिस बदलाव की जरूरत है वो आज भी नजर नहीं आता. सिर्फ कानून बनाने से कुछ नहीं होगा. उसका सख्ती से पालन भी होना चाहिए.
निर्भया कांड के बाद कानून में संशोधन करके उसे निर्भया एक्ट नाम दिया गया. रेप पीड़ित लड़कियों की मदद के लिए 10 अरब रुपए से निर्भया फंड बनाया गया है. लेकिन अभी तक ठीक से इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है.


Saturday, 5 November 2016

रन मशीन विराट कोहली को हैप्पी वाला बर्थडे मुबारक हो

करोड़ो दिलों की धड़कन बन चुके भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली का आज हैप्पी वाला बर्थडे है. विराट का जन्म 5 नवम्बर 1988 में दिल्ली में हुआ. उनके पिता का नाम प्रेम कोहली और माता का नाम सरोज कोहली है. उनका एक बड़ा भाई विकास और बड़ी बहन भावना है.

HAPPY BITRHDAY VIRAT  




विराट ने क्रिकेट में कम समय में अपनी कभी न मिटने वाली पहचान बनाई है. 

खेल में ही नहीं बल्कि विज्ञापन की दुनिया में भी विराट छाए हुए हैं. विराट के कई नए रिकॉर्ड बनाएं हैं तो वहीं पुराने रिकॉर्ड तोड़े भी हैं.

लाखों लड़कियों को अपना दीवाना बनाने वाले बॉलीवुड की फेमस एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा के दीवाने है. विराट और अनुष्का के रिश्ते ने कई उतार-चढ़ाव का सामना किया है. कभी लिंकअप तो कभी ब्रेकअप की खबरें सुर्ख़ियों में छाई रहीं.

विराट ने सफलता की सीढियों पर चढ़ते हुए कई मुकाम हासिल किए हैं. उनकी इस सफलता का राज सिर्फ और सिर्फ विराट की कड़ी मेहनत और लग्न है.

सबके दिलों पर राज करने वाले विराट के बारे में कुछ खास बातें जानने का हक उनके फैन्स और जो उनके फैन्स नहीं उनको जरुर है.

विराट की खास बातें-
सफलता के झंडे गाड़ने वाले विराट को पहली सफलता 19 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा होने पर मिली.

उन्होंने शुरुआत में क्रिकेट दिल्ली की ओर से खेलें.

विराट ने ही सबसे तेज शतक बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया.

विराट साल 2008 में अपने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय (एकदिवसीय) मैच से शुरुआत की और साल 2011 में टीम इंडिया को वर्ल्डकप जितने में मदद की.

साल 2011 किंग्सटन में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टेस्ट खेला था. 

साल 2011 विश्व कप के पहले मैच में शतक बनाने वाले पहले भारतीय बने

साल 2012 में विराट ने आईसीसी वनडे प्लेयर में जगह बनायी.

साल 2013 में उन्होंने पहली बार वनडे बल्लेबाज मे शीर्ष स्थान हासिल किया था.

क्रिकेट के साथ वह फैशन इंडस्ट्री में जाना-माना नाम बने हुए हैं.

हाल ही में विराट ने रहमान के साथ एक गाना गाने को रैप किया है.


ये तो हैं विराट के बारे में खास बातें, जिन्होंने सभी को अपना दीवाना बनाया हुआ है. बच्चा हो या जवान सभी के जुबान पर विराट ही विराट हैं. विराट को बर्थडे की खूब सारी बधाई और ढेर सारा प्यार. वह अपनी लाइफ में ऐसे ही नए मुकाम बनाते रहें. 

Friday, 21 October 2016

दुनिया का पहला जीवित भूरा पांडा

पांडा बेहद खूबसूरत जानवर है. इसे एक बार देखने के बाद किसी का भी मन इसे बार-बार देखने को जरूर करेगा. काले और सफेद रंग के पांडा तो आप सभी ने देखे होंगे. लेकिन क्या आपने कभी भूरा पांडा देखा है.
अगर नहीं देखा है तो अब देख लीजिए.
यह दुनिया का इकलौता भूरा पांडा है.
इस पांडा का नाम किजाई है.
किजाई का मतलब होता है- सात साल का.
इसकी माँ ने इसे छोड़ दिया था.
जब यह सिर्फ दो महीने का था.

भूरा पांडा का बचपन

किजाई सेंट्रल चायना में किन्ग्लिंग माउंटेन के नेशनल रिज़र्व में बहुत बुरी हालात में मिला था.
किजाई का बचपन बहुत मुश्किल भरा था.
काले रंग के पांडा उसे झुण्ड में नहीं रहने देते थे.
क्योंकि वह सबसे अलग है और उसका रंग भी काला नहीं है.
पांडा का रंग बदलने का कारण साइंटिस्ट ने जेनेटिक म्युटेशन बताया है.
साइंटिस्ट उसके अकेलेपन को दूर करने के लिए एक पार्टनर की तलाश कर रहे हैं.
किजाई का अलग होना उसके लिए वरदान साबित हुआ है.
उसके अलग होने की वजह से उसे फोपिंग पांडा वैली में रखा गया है.
जहां वह एक सेलिब्रिटी की तरह रह रहा है.
वैली में न तो कोई उसे परेशान करने और उसका खाना चुराने वाला भी कोई नहीं है.
किजाई की देखभाल करने के लिए एक आदमी को रखा गया है जो सुबह छह बजे उठता है और उसके सोने के बाद सोता है.


वह उसके खाने से लेकर सभी जरूरतों को पूरा करता है.
किजाई का वजन 220 पाउंड्स है. वह डेली 44 पाउंड्स बांस खाता है.
वह काले पांडा से थोडा धीमा है लेकिन बहुत ही प्यारा है.
पांडा वैली में सभी पांडा के नाम हैं.
जब इनका नाम पुकारा जाता है तो सभी रीएक्ट करते हैं.
लेकिन किजाई नाम बुलाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है.
शायद उसे सीखने में अभी समय लगेगा.

डुनिथ वेल्लालेज खेल की सच्ची भावना की मिसाल

एशिया कप 2025 जहां निगेटिविटी और विवादों में घिरा रहा। वहीं, 22 वर्षीय डुनिथ वेल्लालेज ने खेल की सच्ची भावना सबके सामने पेश की। एक ओर सभी को...