Sunday, 18 October 2020

लालू प्रसाद यादव ने उड़ाया नीतीश सरकार का मजाक

 



बिहार में आगामी विधानसभी चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मियां तेज हैं. आए दिन सत्ता में पकड़ मजबूत करने के लिए राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे की बखिया उधेड़ते रहते हैं. इसी चुनावी दंगल में नीतीश सरकार पर ताबड़तोड़ वार किए जा रहे हैं. नीतीश सरकार भी इस हमले का जवाब बड़ी मुश्तैदी से दे रही है. अब आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर नीतीश सरकार पर निशाना साधा है.

लालू यादव भले ही जेल में हो लेकिन उनके ट्वीट लगातार सुर्खियों में रहते हैं. लालू प्रसाद यादव ने नीतीश सरकार पर 'बिहार में उद्योग' के मामले में हमला बोला है. लालू यादव ने ट्वीट कर नीतीश सरकार पर करारा सवाल दागा है. उन्होंने सवाल किया है कि बिहार में अब हिंद महासागर भेजा जाए क्या? पंद्रह सालों की नाकामी पर सिर्फ गाल बजाएंगे क्या? नीतीश कुमार, आप थक गए हैं, अब जाकर आराम कीजिए. इस ट्वीट के साथ ही आरजेडी द्वारा बनाया गया एक कार्टून भी है. इस कार्टूव में पानी ले जा रहे कुछ व्यक्तियों से एक शख्स सवाल पूछता है जिसके जवाब में वो कहते हैं - समंदर बनाने जा रहे हैं बिहार में, नीतीश कहते हैं समुन्दर दो तब कारखाना लगाऊंगा.

आपको बता दें कि लालू यादव का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट उनके कार्यालय द्वारा संचालित किया जा रहा है.

वहीं चिराग पासवान ने पिता दिवंगत राम विलास पासवान के दसकर्म पर बाल मुंडवाते हुए कहा कि नीतीश कुमार को दुबारा मुख्यमंत्री बनने से रोकने की हर मुमकिन कोशिश करूंगा.

रविवार को बक्सर में चुनावी सभा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को सोचना तो कुछ नहीं है, काम तो कुछ नहीं है, बस कुछ से कुछ करके अपना पैसा बनाना है. हमने तो सबके विकास के लिए कार्य किया है. हम लोग मिलकर बिहार को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे.

Thursday, 17 September 2020

देश के भविष्य के लिए गांव का विकास जरूरी

 


देश के सुनहरे भविष्य के लिए गांव का विकास होना बहुत जरूरी है. जिस तरह मछली को जीवित रहने के लिए जल जरूरी वैसे ही देश के उत्थान के लिए गांव की मजबूती. शहर हो या विदेश लोगों की जड़े आज भी गांवों से जुड़ी हुई हैं. अगर गांव रूपी जड़े कमजोर होंगी तो देश रूपी पेड़ फल-फूल नहीं पाएगा.

महात्मा गांधी कहा करते थे कि भारत गांवों में बसता है. भारत को जानना है तो गांव को जानना होगा. जैसा कि सभी को पता है भारत एक कृषि प्रधान देश है. देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि का बड़ा योगदान है. देश की दो तिहाई जनता खेतीबाड़ी और उससे जुड़े हुए कामों से जीवनयापन कर रही है. फिर भी किसान और गांव उपेक्षित हैं. लोग खेती छोड़ गांव से शहर की ओर आ रहे हैं. इसे रोकने के लिए सरकार को गांवों को विकसित और मजबूत बनाने की योजना बनानी होगी.



स्मार्ट सिटी में पैसे बर्बाद करने से अच्छा गांवों के विकास पर ध्यान दिया जाए,क्योंकि भारत का भविष्य गांव और किसान हैं. पलायन को रोकने के लिए सरकार को ऊसर हो रही जमीन पर गांवों के विकास की फसल के बीज बोने चाहिए, जिससे गांव छोड़कर जाने वाले किसान वापस आ सकें और देश के भविष्य को बचाने में मदद कर सकें.

कोरोना ने सरकार को नई योजनाएं और लोगों को अवसर दिया है कि वह अपने गांव में रहकर नई तकनीकें अपनाकर खेती कर सके. सरकार के 20 करोड़ के पैकेज में किसानों के लिए भी कई योजनाएं हैं, जो गांव के विकास में सहायक होंगी.

आत्मनिर्भर भारत का मूल ग्रामीण विकास में छिपा है. सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय वित्त वर्ष 2020-21 में 2,00,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ग्रामीण भारत के विकास के लिए खर्च करने की घोषणा की. लॉकडाउन में सरकार ने गांवों में मनरेगा के माध्यम से कार्य करवाते हुए इसे रोजगार का जरिया बनाया है, जो वाकई मददगार साबित हो रहा है. ऐसी योजनाएं गांवों की तरक्की के नए रास्ते खोल सकती है.



सरकार गांव की अर्थव्यवस्था, संस्थागत ढांचे को व्य​वस्थित करें. साथ ही गांव में पैदा किए गए अनाज और उत्पादों को बेहतर सप्लाई चेन के जरिए सही जगह तक पहुंचाने के लिए बेहतर इंतजाम हों तो गांव को खुशहाल होने से कोई नहीं रोक सकता. गांव और किसान अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए स्वयं का उत्पादन करने का आत्मबल हासिल करेगा. शिक्षा के अवसर प्रतिस्पर्धी, कौशल युक्त तथा सबके लिए समान हों. बुनियादी जरूरतें पूरी हों.

देश में कोरोना के चलते बड़े-छोटे सभी उद्योग, कामकाज ठप हो गए थे. वहीं खेती का काम बिना रूके जारी था. समस्यों के बाद भी फसलों की बुवाई और कटाई में कोई फर्क नहीं पड़ा. मौजूदा समय में कृषि का कार्य बेहतर हो रहा है. सरकार किसानों की फसलों को अच्छा बाजार दे, ताकि आर्थिक रूप से किसान मजबूत हो सके.



मौजूदा सरकार ने भारत के उज्जवल भविष्य के लिए ग्रामीण विकास की नींव मजबूत कर दी है. सरकार की नई योजनाएं और पैकेज गांवों और किसानों के लिए मददगार साबित होगी और वह देश के निर्माण में मजबूती के साथ खड़े होंगे.

आज गांवों में शौचालय, स्वच्छता, धुआं मुक्त रसोई पहले की तुलना में बेहतर हुई है. अब गांव बुनियादी समस्याओं से मुक्त होकर भविष्य की चुनौतियों से लड़ने के लिए अधिक तैयार हो चुका है. गांव भारत के भविष्य का अहम हिस्सा है, जिसके लिए कार्य होते रहने चाहिए.

Friday, 11 September 2020

महाराष्ट्र सरकार से एक बेबाक लड़की बर्दाश्त नहीं हो रही

 


सोशल मीडिया हो या न्यूज चैनल हर जगह कंगना चर्चा में हैं. कहीं सपोर्ट तो कहीं कंगना को लताड़ मिल रही. पुतले जलाने से लेकर तस्वीर पर चप्पल मारना. लोगों की गलियां और दादागिरी सब का सामना कर रही हैं, बॉलीवुड से सपोर्ट न मिलने पर भी वह डटी हुई हैं.

कंगना से हमेशा सहमत नहीं होती हूं. क्योंकि उनका बड़बोलापन दिमाग की दही कर देता है. लेकिन उनकी हिम्मत और साहस को मेरा सलाम है. महाराष्ट्र में सरकार के खिलाफ बोलना आसान नहीं. सबके बस की बात नहीं होती. किसी के गढ़ में जाकर डटे रहना.

सुशांत की मौत के बाद से ही कंगना ने खुलकर बॉलीवु की धज्जियां उड़ाई हैं. किसी को पब्लिसिटी स्टंट तो किसी ने राजनीति से जुड़ने की बात की. पर यहां कंगना के साथ कोई नहीं दिखा. महाराष्ट्र सरकार को भी कंगना की बेबाकी रास नहीं आई. और कंगना के पीछे नहा-धोकर पड़ गए.

सत्ता के नशे में चूर संजय राउत ने कंगना को हरामखोर तक कह डाला. उन्हें मुंबई न आने की धमकी तक दे डाली. मन नहीं भरा तो उनका ऑफिस गिरा दिया. 30 सिंतबर तक का इंतजार नहीं हुआ. वह अपना कर्म किए जा रही हैं, जिसे जो करना है कर लो. महाराष्ट्र सरकार से एक बेबाक लड़की नहीं बर्दाश्त हो रही है. सब इतने नाजुक हैं कि एक लड़की को हराने के लिए एकजुट है.

फेमिनिज्म का डंका बजाने वाले लोग कंगना को कई तमगों से नवाज रहे हैं. कंगना को कोसा जा रहा है. उन्हें घटिया, बाइपोलर, चुड़ैल, हरामखोर कहने से भी कतरा नहीं रहे. रिया को इंसाफ दिलाने के लिए कैंपेन चलाए जा रहे हैं. रिया के सपोर्टर को लगता है कि टॉर्चर किया जा रहा है. लेकिन कंगना के लिए इनके मुंह से चू भी नहीं निकली.

चाहे वह कंगना हो या रिया, चरित्रहनन किसी का भी हो गलत है. एक महिला को सपोर्ट करने वाले लोग दूसरी महिला को गरियाने से नहीं चूकते. लोग दोहरी मानसिकता में जी रहे हैं. इनका यही दोगलापन महिलाओं के लिए घातक है.

Tuesday, 14 July 2020

एक सवाल --कब होगी सुशांत की डेथ मिस्ट्री की सीबीआई जांच?????


आज सुशांत को गए 1 महीना हो गया. लेकिन सिचुएशन वहीं की वहीं है. सुशांत की मौत की सीबीआई जांच के लिए एक पत्ता भी नहीं खरका. राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. ना ही किसी बॉलीवुड के बड़े एक्टर ने इसके लिए कुछ बोला कि सुशांत की डेथ की मिस्ट्री सुलझे. कुछ गिने -चुने कलाकारों ने आवाज उठाई,जिनकी किसी ने नहीं सुनी..
अब तक तो कई अहम सबूत भी सुशांत की तरह पंच तत्व में विलीन हो चुके होंगे. आने वाले दिनों में बचे हुए सबूत भी शायद ठिकाने लग चुके होंगे. तब शायद सत्ता पर काबिज लोग सीबीआई जांच के लिए मन बनाएं या हो सकता है ना भी बनाए कुछ भी हो सकता है इस देश में क्योंकि यहां तो प्रजा तंत्र  है.
कुछ समय बाद सुशांत के बर्थडे और डेथ एनीवर्सरी पर ही लोग स्टोरी बनाएंगे या शायद वेब सीरीज या फिल्म बनाए , जिसमें एक डेथ लोगों के लिए सुसाइड या मर्डर मिस्ट्री बनकर रह जाएं लेकिन कुछ लोग अभी भी उम्मीद नहीं हारे हैं वह सुशांत के केस की सीबीआई जांच कराने के लिए जीजान से लगे हुए हैं. 
सुशांत की मौत सभी के लिए एक रहस्य बन गई है. कुछ के लिए सुसाइड तो कुछ के लिए मर्डर है. 14 जून की वो मनहूस दोपहरी ने सभी को चौंका दिया, चैनलों पर धड़ाधड़ ब्रेकिंग चलने लगी किसी को भी यकीन करना मुश्किल था कि सुशांत सिंह राजपूत ने सुसाइड कर लिया, जिनमें  से मैं भी एक थी यकीन करना मुश्किल था कि सुशांत जैसा जिंदादिल इंसान ऐसा कर सकता है पर सच था कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी वायरल हुईं जो सुशांत की थी मरने के बाद  देखने से लग ही नहीं रहा था कि सुशांत ने फांसी लगा कर सुसाइड किया है. क्योंकि मीडिया फिल्ड में होने के कारण मैंने कई ऐसे वीडियो और रॉ तस्वीरें देखीं हैं, जिनमें फांसी लगाने के बाद चेहरे की दुर्दुशा हो जाती है, लेकिन सुशांत के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ. दिन बीतते गए कई लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से सुशांत के सुसाइड को मर्डर बताया. कई बड़ी हस्तियों के शामिल होने की बाते कही गईं. नेपोटिज्म को भी हथियार बनाया गया. कई नामी वकीलों ने भी सुशांत के मौत को मर्डर बताया. लोग डेली सीबीआई जांंच की मांग करते हैं. कई तरह की चीजें बताई दिखाई जाती हैं मुंबई पुलिस के मुताबिक ये एक सुसाइड है. भले ही कुछ भी हो लोग आज भी सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे. 
सुशांत के जाने के बाद कई तरह की कहानियां चल रही हैं, जिनमें से एक डिप्रेशन है. ये एक बड़ी समस्या है. लेकिन समस्या से किसी के गुनाह पर पर्दा नहीं पड़ सकता है. 
एक महीना हो गया लेकिन अभी भी सुशांत को न्याय नहीं मिला...

हर जगह है विराट का बोलबाला, बतौर कप्तान दिलाई इतने टेस्ट मैचों में जीत




क्रिकेट हो या एंटरटेनमेंट  की दुनिया भारतीय  क्रिकेट टीम के कैप्टन विराट कोहली जान माना और हर दिल अजीज हैं. क्रिकेट के मैदान में रन मशीन विराट ने कई रिकॉर्ड को धराशायी किया वहीं कई रिकॉर्ड बनाए, जिन्हें तोड़ने की कोशिश जारी है. 
विराट ने अपने करियर की शुरूआत से लेकर अभी तक उनका ग्राफ लगातार बढ़ता ही रहा है. चाहे वो एक खिलाड़ी की तरह हो या कप्तान के तौर पर.  
विराट ने अपनी कप्तानी में कई क्रीर्तिमान कायम किए हैं. टेस्ट हो, या हो वनडे या फिर टी20 हर जगह बस विराट का ही बोलबाला  है. 
रिकॉर्ड्स की बारिश तो विराट के बाएं हाथ का खेल है. कई भारतीय खिलाड़ियों ने भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर टेस्ट मैच जीते, लेकिन विराट ने अबतक 86 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें से 33 टेस्ट मैचों में बतौर कप्तान जीत हासिल की है. विराट ने एक कप्तान  के तौर पर सबसे ज्यादा मैच जीतें हैं.
विराट ने अबतक टेस्ट मैच में 7,240 रन बनाए हैं. विराट ऐसे ही अपने फैंस के दिलों पर राज करते रहेंगें और रिकॉर्ड्स बनाते रहेंगें.

डुनिथ वेल्लालेज खेल की सच्ची भावना की मिसाल

एशिया कप 2025 जहां निगेटिविटी और विवादों में घिरा रहा। वहीं, 22 वर्षीय डुनिथ वेल्लालेज ने खेल की सच्ची भावना सबके सामने पेश की। एक ओर सभी को...